नई दिल्ली, 21 जुलाई। दिल्ली-एनसीआर में छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोचिंग सेंटरों के लिए बड़े स्तर पर सुरक्षा जांच अभियान जारी है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 923 कोचिंग संस्थानों का व्यापक निरीक्षण शुरू किया है। यह अभियान अग्नि सुरक्षा, भवन निर्माण नियमों, आपातकालीन निकास व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच के लिए चलाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो संस्थान निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सीलिंग तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
शिक्षा विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की संयुक्त टीमें राजधानी के प्रमुख कोचिंग हब—मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, कटवारिया सराय और अन्य इलाकों में लगातार निरीक्षण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक संस्थान में फायर सेफ्टी सिस्टम, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और छात्रों की क्षमता के अनुसार व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है।
सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन उपकरण नहीं पाए जाएंगे, आपातकालीन निकास बंद होंगे या भवन नियमों का उल्लंघन मिलेगा, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। संबंधित संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कमियों को दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राजधानी में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों में अध्ययन करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल भवन निर्माण की अनुमति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित सुरक्षा ऑडिट और आपातकालीन अभ्यास भी अनिवार्य होने चाहिए। इससे किसी भी दुर्घटना की स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।
निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों को छोटी-मोटी कमियों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, वहां नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि तय समय के भीतर सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों को सील भी किया जा सकता है। इसके अलावा भविष्य में नियमित निरीक्षण जारी रहेगा ताकि सुरक्षा मानकों का लगातार पालन सुनिश्चित किया जा सके।
दिल्ली सरकार ने छात्रों और अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि किसी कोचिंग सेंटर में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमी दिखाई दे तो उसकी सूचना संबंधित विभाग को दें। प्रशासन ने कहा है कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार चाहती है कि छात्र बिना किसी भय के सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि बहुमंजिला इमारतों में संचालित कोचिंग संस्थानों के लिए अग्निशमन प्रणाली का पूरी तरह कार्यशील होना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक भवन में पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र, स्मोक डिटेक्टर, अलार्म सिस्टम और स्पष्ट रूप से चिन्हित आपातकालीन निकास होने चाहिए। साथ ही समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर छात्रों और कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
कोचिंग संचालकों ने भी प्रशासन के साथ सहयोग करने का भरोसा जताया है। कई संस्थानों ने सुरक्षा उपकरणों को अपडेट करने और आवश्यक सुधार कार्य शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी निर्धारित मानकों का पालन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल एक बार की कार्रवाई नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे नियमित प्रक्रिया बनाया जाना चाहिए। लगातार निरीक्षण, पारदर्शी निगरानी और कड़े नियमों के पालन से भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशासन ने भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा को लेकर आने वाले समय में और अधिक सख्ती बरती जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।