नई दिल्ली, 21 जुलाई। देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार बदल रहे मौसम के बीच भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और असम सहित कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के बाद राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से भी अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।
उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा होने की संभावना है। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, सीतापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश दर्ज की जा सकती है। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है।
राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या अधिक रहती है वहां पहले से ही पंपिंग स्टेशनों को सक्रिय रखने और जल निकासी की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगमों और स्थानीय निकायों को नालों की सफाई तथा जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है ताकि लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम ने करवट ले ली है। कई इलाकों में हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों तक कई स्थानों पर तेज बारिश जारी रह सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़क यातायात प्रभावित होने और कार्यालय समय में लंबा ट्रैफिक जाम लगने की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि बारिश के दौरान आवश्यकता होने पर ही घरों से बाहर निकलें।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कें बाधित होने का खतरा बना हुआ है। कई संवेदनशील मार्गों पर मशीनें और राहत दल पहले से तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है और यात्रियों से मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की गई है।
बिहार और झारखंड के कई जिलों में भी लगातार बारिश होने की संभावना है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों की सूची तैयार कर ली है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। राहत शिविरों के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।
राजस्थान में लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह मौसम राहत लेकर आया है। राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश संतुलित मात्रा में होती है तो खरीफ फसलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन और अन्य फसलों के उत्पादन में सुधार की उम्मीद है। हालांकि अत्यधिक वर्षा होने पर खेतों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, पालघर और कोंकण क्षेत्र में भी भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। कई स्थानों पर आपदा प्रबंधन दलों को पहले से ही तैनात कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लगातार बारिश के कारण डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार और पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों से साफ पानी पीने, घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बुखार, उल्टी, दस्त या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
यातायात विभाग ने भी वाहन चालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। बारिश के दौरान तेज गति से वाहन न चलाने, जलभराव वाले मार्गों से बचने और पर्याप्त दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बिजली गिरने की संभावना वाले क्षेत्रों में खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की भी चेतावनी दी गई है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम कर रहे किसानों से भी खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर चले जाने की अपील की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रह सकती है। इसके कारण कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज होने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार हैं। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए आने वाले कुछ दिन सावधानी और सतर्कता के साथ बिताने की सलाह दी गई है।