New Delhi
नई दिल्ली (4 जुलाई 2026) साइबर अपराध के खिलाफ़ सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन) का प्रहार।
सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए CBI ने ओडिशा और राजस्थान में सात अलग-अलग ठिकानों पर सघन तलाशी के बाद तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से जुड़े इस मामले में अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ की फर्जी धमकी देकर डराया और 2.07 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने पर मजबूर कर दिया। CBI ने इस संबंध में 25 मार्च 2026 को केस दर्ज किया था।
जांच के दौरान पता चला है कि ठगी की गई रकम को एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में भेजा गया था, गिरफ्तार किए गए आरोपी इस अवैध कमाई को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इधर-उधर खपाने में जुटे थे।
दो आरोपियों को बालासोर (ओडिशा) और तीसरे को नागौर (राजस्थान) से पकड़ा गया है। तलाशी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं।
इस मामले पर CBI ने साफ किया “डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं”
कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है। एजेंसी ने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों की मदद करने वाली संस्थाओं के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई का संकल्प दोहराया है।
CBI ने आम जनता से अपील की है कि वे इन्वेस्टमेंट स्कीम या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल्स से न घबराएं। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की शिकायत तुरंत इन नम्बरों पर करें
नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या नजदीकी पुलिस स्टेशन।