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सीकरी के बारे में आपकी बातें सबूत हैं इस बात का कि आपका दिल वहीं बसता है!

jama masjid sikri

ग़ाज़ियाबाद (5 दिसंबर 2019)- सीकरी की चर्चा क्या शुरु हुई, कई मेरे अज़ीज़ और मुख़लिस साथियों के फोन उनके कमेंट आने लगे। बेहद ख़ुशी हो रही है कि उनकी बातें भी सामने आ रहीं हैं, जो यक़ीनन हैं तो अपने अज़ीज़ ही, मगर उनसे कभी मिले नहीं या आज वो बेहद दूरी पर बैठे हैं।
आज आपसे दो बातों का ज़िक्र करूंगा। बल्कि सही तो ये है कि बात एक, जो मैंने ख़़ुद देखी, दूसरी सुनी सुनाई यादों की तरह। अरे जनाब इससे पहले ये भी बताता चलूं कि मेरे अज़ीज़ मियां दानिश अलीम ने लिखा है कि उनके दादा जान जनाब मौलाना अलीम अख़्तर साहेब जिनका ताल्लुक़ सीकरी से ही है, किसी ज़माने में हिजरत करके सीकरी से नीरगाजनी और बरला छपार के बीच बसे बसेड़ा में जाकर बस गये थे। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )उसके बाद दिल्ली आ गये थे। मियां दानिश अलीम के दादा साहेब मेरे बुज़ुर्ग मेरे अज़ीज़ और बेहद मुखलिस और ज़िंदादिल नेक इंसान थे। उनके यहां फाटक हबश ख़ां में अक्सर जाना रहता था। उनके बेटे और मियां दानिश अलीम के वालिद ए मोहतरम जनाब अज़ीम अख़्तर साहेब से, वैसे भी मेरा बड़ा ही ख़ास रिश्ता है। जो कि दिल्ली सरकार में आला मुक़ाम पर फायज़ रहे, और ए.डी.एम के सम्मानित पद से रिटायर होकर अब दिल्ली के ओखला इलाक़े में क़यामपज़ीर हैं। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )अज़ीम अख़्तर साहेब की अज़मत सिर्फ इसमें ही नहीं है, कि वो बड़े अफसर रहे हैं, बल्कि ईमानदारी से इतने बड़े बड़े ओहदों पर रहने के बाद, बिना एक भी रुपया रिश्वत या घोटाले के रिटायर होकर, उन्होने न सिर्फ सीकरी का नाम रोशन किया, बल्कि ये साबित किया कि सीकरी की सरज़मीं हमेशा बुज़ुर्गी और ईमानदारी की अलामत रही है।
तो बात कर रहे थे मियां दानिश के दादा जान की, तो हमने वैसे उनको देखा तो है, लेकिन यादों में सुनी हुई बातें भी शामिल हैं। उनके यहां की नशिस्त-बर्खास्त बेहद नफीस और ख़ास रहती थी। देश के बड़े और नामवर शोअरा और अफसरान उनके यहां मामूली अंदाज़ में ही रहते थे। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )उनको याद करके एक बात समझ में आ रही है पिछले ज़माने में लोगों के दिल बहुतत बड़े होते थे, चाहे मकान छोटा ही क्यों न हो।
बहरहाल अब मैं मियां दानिश से रिक्वेस्ट करूंगा कि ख़ुद भी कुछ और भेजें वैसे भी मैनें दो बातें एक मेरी और दूसरी यादों की सुनाने का वादा किया है।
तो जनाब पहली एक याद, सीकरी के एक हरदिल अज़ीज़ बेहद मुख़लिस और सिर्फ दूसरों के लिए जीने वाली शख़्सियत की। नाम की गुस्ताख़ी के साथ। उनके बारे में किसी ने मुझको बताया था कि वो एक बार विदेश गये। सीकरी के एक बड़े घराने और किसी ज़माने में छोटी सरकार कहलाए जाने वाले उस शख़्स से मिलने के लिए। वो उनके घर पहुंचे। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )पूछते मालूम करते वो उनके घर तो पहुंच गये। यहां की तरह ही वहां भी उनका रुतबा था। घर के बाहर गार्ड नौकर चाकरों की भीड़ के बीच, उनसे पूछा गया कि किससे मिलना है, आपने टाइम लिया था, कि नहीं, आप कौन हो वग़ैरा वग़ैरा। लेकिन उन्होने गेट से ही उनका नाम लेकर… ज़ोर से आवाज़ लगाई…मारूफ़…। चौकीदार, नौकर चाकर घबरा गये, उनके साहब का नाम लेकर एक मामूली कुर्ते पजामे और जूतियों वाला शख़्स, मानो बेइज़्ज़ती कर रहा है। लेकिन इसी दौरान उन्होने देखा कि उनके साहब जैसे थे, वैसे ही दौड़े हुए चले आ रहे हैं, और उस मामूली दिखने वाले बुज़ुर्ग को गले लगा लिया। दोनों मिलकर रोए, और साहब बोले कि मैं समझ गया कि यहां मुझे मेरे नाम से पुकारने वाला, मेरे वतन का ही कोई हो सकता है। लेकिन इस दौरान बुज़ुर्ग ने जो कहा वो भी सीकरी की सनद है। उन्होने कहा कि तू अगर फौरन न आता तो मैं वापस अपने देश चला जाता। सिर्फ यही देखना था तू बदल तो नहीं गया।
बहरहाल सीकरी का आम से आम शख़्स भी किसी से न तो मरऊब होता है, और न दबता है। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )
अब सुनिए मेरे साथ की बात। साल 2002-03 की बात है। किसान यूनियन का बड़ा प्रोटेस्ट मुज़फ़्फ़रनगर मे चल रहा था। भीड़ और किसान, वो भी जाट लैंड का। सभी बेक़ाबू थे। मुझे अपनी ख़बर भी दिखानी थी, और कैमरे और क़ीमती इक्विपमेंट्स को भी बचाना था। करोड़ों का सैटअप मेरे साथ था। बाबा टिकैत जीवित थे। वो और उनके बेटे राकेश भाई बहुत ख़्लाल करते थे।(ये बाद में बताऊंगा कि बाबा टिकैत के साथ उनके घर पर गरम गरम खिचड़ी खाने के दौरान कैसा लगा, और नईमा आंदोलन का भी यादें आप भेजें) उन्होने ही मेरे लिए एक ऊंची सी जगह ख़ाली करा कर मेरा सैटअप लगवा दिया। थोड़ी दूर पर लाइव प्रसारण वाली ओबी लगा दी गई। हमारा बुलेटिन नोएडा स्टूडियो से प्रसारित हो रहा था, मैं यहां खड़ा होकर मुज़फ़्फ़रनगर किसानों के आंदोलन को, देश की जनता को लाइव दिखा रहा था।(YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com ) एंकर के सवाल जवाब सीधे बिना देखे बोलना था, बेहद दबाव और टेंशन का वक़्त था। तभी नीचे से किसी ने जैसे मुझे हिला दिया, मेरा पैर पकड़कर कोई झिंझोड़ रहा था। मुझे कैमरा फेस करना था, मैं नीचे नहीं देख सकता था। जब हालात ज़्यादा बिगडते दिखे और मेरा बैलेंस ख़राब होने का अंदेशा होने लगा तो मैंने अपने आप से ही एंकर को बोला फिलहाल लेते हैं एक ब्रेक हम जल्द हाज़िर होते हैं। वो हैरान रह गया। स्टूडियो में जो हुआ वो मुझको अगले दिन पता चला। लेकिन जब मैनें नीचे देखा और अपने साथियों और स्टाफ पर ग़ुस्सा होने का इरादा किया, तो वहां सीकरी के ही एक साहेब खडे दिखे। जिन्होने मुझसे कहा कि, ओ सुनी नी रा। मैं नीचे उतरा बहुत तेज़ी से सब कुछ अचानक बग़ैर कुछ सोचे या प्लान किये, अपने स्टाफ को उनको हटाने से रोका और उनको गले लगाया, और पूछा आप यहां कहां। वो बोले तू यां क्या कररा। मैनें बताया ख़बर कवरेज कर रहा हूं, टीवी पर आती है। उन्होने पूछा तू भी दिख्खे क्या। मैंने कहा जी, और उनको ओबी में ले जाकर ख़बरें दिखाईं। बेहद ख़ुश हुए वो। मैंने उनसे कोई शिकायत न करके उनसे कहा कि अगर आपके पास वक़्त हो तो रुकिए और ख़ामोशी से सिर्फ देखिए। वो मान गये। मैं दोबारा अपनी जगह आया और काफी देर तक वो वहीं बैठे रहे।(YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com ) उनके चेहरे के तास्सुरात बेहद ख़ुशी और अपनेपन के थे। जब जाने लगे तो मुझ से बोले कि आख़री बस न निकल जाए। और वो चले गये। मेरे स्टाफ ने मुझसे पूछा सर आपने उनको डांटा क्यों नहीं, क्या वो कोई ख़ास आदमी या आपके रिश्तेदार थे। मैनें कहा मेरे गांव के, मेरे अपने थे। बहरहाल जब भी मैं सीकरी गया उन्होने हमेशा मुझको सराहा और मुझसे मौहब्बत से मिले। हो सकता है कि मैं उस दिन दुनियांवी रुतबे, या वक़्ती ग़ुस्से में, या दबाव में, एक मामूली दिखने वाले इंसान के साथ कोई गुस्ताख़ी कर बैठता, तो शायद मैं एक अपना और एक सच्चा फैन खो देता हमेशा के लिए, और सीकरी का ऐसा क़र्ज़ मुझपर चढ़ जाता जो कभी न उतरता। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )
तो जनाब सिलसिला जारी है। एक बात और… जो मज़ा मुझको सीकरी राजबाहे में नहाने और गरमी में जाना और नहाकर फिर गरमी में वापस आने में मिला, बड़े से बड़े स्नीमिंग पूल में भी नहीं मिला। और हां, अपने घर में, चूल्हे के सामने, छोटी छोटी लकड़ियों के तख़्तों पर, परिवार के साथ, चूल्हे के सामने नदीन भय्या, काज़िम भय्या के साथ बैठना, और हां चूल्हे का धुआं उसी तरफ होते रहना, जिधर हम हटकर बचते थे, और ताए अब्बा हाफ़िज़ इशरत साहेब (अल्लाह बख़्शे) हमारे साथ बैठे, चूल्हे में छोटे छोटे तिनकों को डालते ऐसे लग रहे हैं कि ये सब उनकी मौहब्बत कभी नहीं भूली जा सकती।(YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com ) और हां ये सभी लोग शेयर करें कि उनको राजबाहे में नहाने से ज्यादा किस फाइव स्टार स्वीमिमंग पूल में मज़ा आया और किस फाइव स्टार कैंडल लाइट डिनर के सामने वो सीकरी के चूल्हे के धुएं को भूलने की हिम्मत कर सकते हैं।
सिलसिला लंबा है। बहुत लोग हैं। मेरे बड़े भाई मुसव्विर साहेब का शुक्रिया, उन्होने एक वाक़या शेयर किया कि बाहर से कुछ लोग आए थे और उन्होने खेत पर काम रहे हाली (यानि हल चलाने या मज़दूरी करने वाला, किसान का सहयोगी) से पूछा कि मियां जी घर पर होंगे। तो उस अनपढ़ हाली ने जवाब दिया कि वल्लाह आलम बिससवाब, यानि अल्लाह बेहतर जानता है। मुसव्विर (मव्वीर भाई) भाई ने बताया कि सीकरी की महफिलें बुज़ुर्गों का साथ और इल्मी मुबाहिसे यहां की पहचान थीं। उधर दोहा से मेरे अज़ीज़ और ताए अक़ील (अब्बा क़ीले) और जनाब नसीम साहेब के बेटे नसीम कौसर साहब ने मश्विरा दिया है, कि इसको जारी रखा जाए और वेटसाइट बनाई जाए। तो उनसे दरख्वास्त है कि वो अपने दादा मरहूम से लेकर अब तक की यादों को उनकी ज़िंदादिली, ईमानदारी और मेहनत को शेयर करें। साथ ही उनकी इत्तिला के लिए अर्ज हैं कि OPPOSITION NEWS http://www.oppositionnews.com पूरी तरह से सीकरी का है, आपका ही है। इसमें ख़ामियां होना और आपका मश्विरा न आना आपकी ही ग़लती मानी जाएगी। जबकि उनके ही छोटे भाई और मेरे अज़ीज़ गौहर नसीम मियां ने हौंसला अफज़ाई की है।
साथ ही यक़ीनन हमारी ही एक अज़ीज़ अलीगढ़ से फौज़िया तारिक़ ने भी हौंसला अफज़ाई की है। अलीगढ़ का ज़िक्र भी ड्यू है। भाई ओवेस की पहल, भाई युसुफ साहेब, क़ुरैश भाई मुजीब भाई, मामू नाज़िम साहेब और हां नई जनरेशन में डॉक्टर रूबी, जो कि हमारी बेहद अज़ीज़ और मुजीब साहेब और एम मिसबाह दि लीजेंड और ऑफ सीकरी से ताल्लुक़ रखतीं हैं , का भी ज़िक्र करने के लिए आप यादें शेयर करें। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com )
आज आख़िर में सीकरी को धड़कनों में बसाए रखने वाले जनाब आसिफ मदनी साहेब का शुक्र गुज़ार हूं, उनके साथ बैठने का अक्सर मौक़ा मिला उनसे बहुत कुछ मिला है। हिजरत करने वाले नामों उनका नाम भी सरे फहेरिस्त है, लेकिन जिस्मानी हिजरत सिर्फ.. रूह उनकी सीकरी में ही बसती है। सभी का डिटेल से ज़िक्र होगा। (YOU ARE WATCHING https://www.oppositionnews.com ) करने वाले बड़े नामों में से एक नाम जनाब एडवोकेट हाफ़िज़ ज़ुबैर साहेब का भी करना है। उनके बच्चों में नामवर वकील और सहाफी और मैनेजमेंट का आला हुनर रखने वालों की ज़िक्र। लेकिन उनके एक बेटे जनाब उबैद सिद्दीक़ी साहेब के बग़ैर सीकरी की यादों में मज़ा कुछ कम हो सकता है। क्योंकि जब सीकरी जाते थे। और बाक़ी दुनियां से मानो कट जाते थे। तो उस ज़माने में बीबीसी ही एक एक प्लेटफार्म था जहां सब इकठ्ठा होकर ख़ामोशी से उसको सुनते थे। मेरे अज़ीज़ और सीकरी के बड़े लीजैंड उबैद साहेब जब बीबीसी में जा पहुंचे तो हर सीकरी वाला यही मानता था कि वो ख़ुद वहां है। साथ ही जब उनकी ख़बरें आती थी तो लोग सुनकर उनको सराहते थे। उबैद साहेब से या उनके मुख़लिसों से दरख्वास्त है अपने संघर्ष के सफर को शेयर करें।(जारी है) (अपनी बात [email protected] पर भेजें)

Post source : REPORTER

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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