फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क राष्ट्र को समर्पित, 7 रेल प्रोजेक्ट्स होंगे 4-लेन
नई दिल्ली 8 सितंबर 2026) भारतीय रेल ने देश के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देते हुए एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अन्तिम सेक्शन का शुभारंभ किया।
वेस्टर्न और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का 2800 किलोमीटर से अधिक लंबा नेटवर्क पूरी तरह तैयार कर राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया है। इसके साथ ही, देश के व्यस्ततम रेल मार्गों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने 7 प्रमुख रेलवे प्रोजेक्ट्स को 4-लेन में अपग्रेड करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर: माल ढुलाई में नए युग की शुरुआत
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का चालू होना भारतीय उद्योग और व्यापार के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
तेज रफ्तार और समय की बचत: विशेष रूप से मालगाड़ियों के लिए बनाए गए इस ट्रैक पर ट्रेनें औसतन 50 से 70 किमी/घंटा और अधिकतम 100 किमी/घंटा की गति से दौड़ रही हैं, जिससे माल ढुलाई का समय आधा रह गया है।
बंदरगाहों से सीधी कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के औद्योगिक केंद्रों को गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाहों (जैसे मुंद्रा, कांडला, पीपावाव और जेएनपीटी) से सीधे जोड़ता है।
लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: माल की त्वरित आवाजाही से देश में लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय गिरावट आएगी, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
7 प्रमुख रेलवे प्रोजेक्ट्स को 4-लेन की मंजूरी: यात्रियों और माल दोनों को राहत
भीड़भाड़ वाले रेल नेटवर्क को सुगम बनाने के लिए कैबिनेट ने 7 अहम रेल मार्गों को 4-लेन करने की हरी झंडी दी है।
भीड़भाड़ से मुक्ति: इन व्यस्त रूट्स पर अतिरिक्त दो पटरियां बिछ जाने से ट्रेनों के बीच होने वाली क्रॉसिंग और अनावश्यक देरी लगभग खत्म हो जाएगी।
यात्री ट्रेनों की समयबद्धता: मालगाड़ियों के लिए अलग क्षमता और पैसेंजर ट्रेनों के लिए समर्पित ट्रैक मिलने से राजधानी, वंदे भारत और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में सुधार होगा।
आर्थिक विकास को गति: इन 7 प्रोजेक्ट्स के पूरे होने से कोयला, सीमेंट, इस्पात और कृषि उत्पादों की ढुलाई क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के 2800 किमी नेटवर्क का विस्तार और 7 प्रोजेक्ट्स का 4-लेन होना भारत की ‘पीएम गति शक्ति’ राष्ट्रीय मास्टर प्लान के विज़न को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।