काठमांडू (7 सितंबर 2026) नेपाल में आई भीषण जल प्रलय के बाद तबाही का जो मंजर सामने आ रहा है, वह किसी का भी कलेजा चीरने के लिए काफी है। सैलाब की विनाशलीला के बीच जहां एक ओर राहत और बचाव में इंसानियत की बेमिसाल तस्वीरें दिखीं, वहीं दूसरी ओर इंसान के भेष में छुपे कुछ दरिंदों ने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया। आपदा के इस घोर संकट में कुछ असामाजिक तत्वों ने शवों से जेवरात, गहने और कीमती सामान उतारकर अपनी हैवानियत का घिनौना सबूत पेश किया। इस संवेदनहीनता ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या संकट की घड़ी में इंसान वाकई अपनी रूह खो बैठता है?
लेकिन इसी भयावह अंधकार और दरिंदगी के बीच बेजुबान की निस्वार्थ वफादारी ने पूरी दुनिया के सामने एक ऐसी नज़ीर पेश की है, जिसने हर आंख को नम कर दिया। जल प्रलय के बाद मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके एक इलाके में, एक वफादार कुत्ता आज भी अपने मालिकों के लौटने की उम्मीद में लगातार बैठा हुआ है। वह ठीक उसी जगह पर टकटकी लगाए बैठा है, जहां कभी उसके आशियाने की चौखट हुआ करती थी।
वह बेजुबान कीचड़ और मलबे में केवल अपने परिवार की आहट तलाश रहा है। एक तरफ जहां इंसानों ने अपनों की लाशों को लूटने में भी शर्म महसूस नहीं की, वहीं दूसरी तरफ इस बेजुबान की यह अटूट वफादारी आज पूरी दुनिया के इंसानों के जमीर को झकझोर रही है। उसकी पथराई आंखें सवाल कर रही हैं कि आखिर असली इंसानियत किसमें बची है हम दो पैरों वाले इंसानों में, या इस चार पैरों वाले बेजुबान में?