अयोध्या के एक परिवार का अंधेरा, सैंकड़ों करोड़ के दीयों के बीच उठते सवाल-मां और बहन की लाशों के साथ महीनों से महिला

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अयोघ्या के देवकली थाना इलाक़े के आदर्श नगर में आसपास के लोगों को कई दिनों से तेज बदबू आने की शिकायत मिल रही थी। बेबर्दाश्त बदबू की इलाके के लोगों ने पुलिस से शिकायत की। गुरुवार को पुलिस ने वहां जाकर जब जांच की और एक घर को चिंन्हित किया जहां से बदबू आ रही थी। पुलिस ने दरवाजा खोला तो वहां मौजूद दीपा श्रीवास्तव नाम की एक महिला को अपनी मां पुष्पा श्रीवास्तव और बहन विभा के कई दिन पुराने सड़े गले शवों के साथ सोता हुआ देखा। पुलिस के मुताबिक यह परिवार उत्तर प्रदेश में एसडीएम रहे स्व. विजेंद्र श्रीवास्तव का है। जिनकी मौत के बाद पुष्पा और उनकी दो बेटियां, विभा और दीपा वहां रहतीं थीं।
शवों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि पुष्पा और विभा की मौत लगभग दो महीने पहले हुई होगी। लेकिन सबसे ख़तरनाक बात यह है कि तीसरी बेटी दीपा उनके सड़े गले शवों के साथ रह रही थी, और बेहद आधूनिक समाज को इसकी भनक तक नहीं लगी। बहरहाल शुरुआती जानकारी के मुताबिक दीपा के पिता विजेंद्र श्रीवास्तव जोकि पूर्व सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट यानि एसडीएम थे। उनकी मौत 1990 में मौत हो गई थी। जिसके बाद उनकी पत्नी तीन दो बेटियां वहां रहती थीं। विजेंद्र श्रीवास्तव की तीन में से एक बेटी रूपाली की कुछ साल बाद मौत हो गई थी। जिसके बाद दीपा अपनी मां और बहन विभा के साथ घर में रहती थी।
कुल मिलाकर काफी साल से अयोध्या कभी फैजाबाद और अयोध्या के बीचे के सफर की चर्चाओं में रहा हो या फिर देश के सबसे पुराने विवाद की वजह से चर्चाओं में है। लेकिन आज ही के दिन सुप्रीमकोर्ट ने एक एतिहासिक फैसले के तहत टैंट में रहने को मजबूर भगवान को पक्की छत देने का रास्ता तो खोल दिया है, लेकिन उसी अयोध्या की एक छत के नीचे भगवान के सबसे प्रिय प्राणी इस दशा में पाए गये कि समाज भी हैरान है।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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