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क्या आतंकी मसूद के मुद्दे को बीजेपी चुनाव में भुनाने लग गई है ?

क्या आतंकी मसूद के मुद्दे को बीजेपी चुनाव में भुनाने लग गई है ?

तो मसूद अज़हर पर दुनिया के सभी बड़े देशों ने नकेल क्या कसी बीजेपी इसे अपनी सरकार की जीत बता रही है। मसूद अजहर पर हुए एक्शन का क्रेडिट पीएम मोदी जहां पूरे हिंदुस्तान को दे रहे, तो वहीं बीजेपी के बड़े नेता इसे नरेंद्र मोदी की जीत बता रहे है। अब जब बीजेपी इस पूरे मामले को कैश करने में जुटी है, तो कांग्रेस बीजेपी को घेरने से कैसे पीछे हट सकते है। कांग्रेस ने इसे भारत की जीत जरुर कहा, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि इसमें नरेंद्र मोदी का काम नहीं बल्कि दुनिया के बड़े देशों का काम ज्यादा है।

मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का काम 2001 में हुए पार्लिमेंट अटैक के बाद ही के जाने लगे थे। हालांकि चीन की मदद से पाकिस्तान हर बार मसूज अजहर को बचा लेता था। कांग्रेस सरकार के समय भी मसूज अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने की भरपूर कोशिशें हुईं, लेकिन सच्चाई ये है कि उस वक्त भारत का स्टैंड मजूबत होने के बावजूद भारत कभी अपने मक्सद में सफल नहीं हो पाया। हालांकि इस बार की बात की जाए तो पुलवामा हमले में भारत को दुनिया के सभी देशों का साथ मिला। इस बार भी बस एक चीन था जिसने फिर पाकिस्तान का साथ दिया, लेकिन अबकी बार भारत की कूटनीति इतनी जबरदस्त थी, पॉलिटिकल प्रेशर चीन पर इतना था के उसे भी झुकना पड़ा। यही बात है कि विपक्षी इसे पीएम मोदी का कम और दुनिया के बड़े देशों का ज्यादा काम मान रहे है।

मसूद को ग्लोबल घोषित करने में कश्मीर में आतंक का कोई जिक्र नहीं और पुलवामा का कोई जिक्र नहीं । यह आश्चर्यजनक है कि प्रतीकात्मक जीत हासिल करने के लिए सीआरपीएफ के लोगों की बलिदानों को कितनी जल्दी बेच दिया गया।

भारत जहां मजूद पर हुई कार्रवाई को अपनी जीत बता रहा है, वहीं पाकिस्तान भी अपनी जीत का झूठा ढोल पीट रहा है। पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने ट्वीट कर इसे पाकिस्तान की जीत बता डाला। फवाद के मुताबिक कश्मीर का संघर्ष पुलवामा के जरिए दुनिया के सामने आया जिससे हमारी बड़ी कूटनीतिक जीत हुई। वहीं चीन ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया जाहिर की चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा इस मुद्दे का निपटारा फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी सहयोग को दर्शाता है, हमें प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र के निकायों के नियमों और प्रक्रियाओं को बरकरार रखना होगा, सभी को सम्मान के सिद्धांत का पालन करना होगा  बातचीत के ज़रिए आपसी मतभेदों को सुलझाते हुए आम सहमति बनानी होगी और तकनीकी मुद्दों के राजनीतिकरण होने से रोकना होगा।

तो एक तरफ पाकिस्तान है जो झूठ बोलकर खुश है, तो वहीं दूसरी तरफ चीन है जो अब मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कर रहा है। दोनों के राग अब बदल चुके है। भले पाकिस्तान अब इसे अपनी जीत बता रहा हो, लेकिन उसे भी पता है कि आतंकवाद को लेकर जितना बदनामी पाकिस्तान दुनियाभर में है उतना कोई नहीं है l

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Originally published on www.bhaskar.com

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