New America
नई दिल्ली (7 सितंबर 2026) इतिहास की किताबों से क्रिस्टोफर कोलंबस का नाम काटने का वक्त आ गया है, क्योंकि 21वीं सदी को अपना नया ‘खोजी बाबू’ मिल चुका है डोनाल्ड ट्रंप। जी हां, दुनिया भर के नक्शों को अपनी मर्जी के मार्कर से रंगने की पुरानी आदत को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति ने एक बार फिर भूगोल पर अपना ट्रेडमार्क चिपकाने की तैयारी कर ली है। ताज़ा फरमानों के मुताबिक, अब ‘न्यू मैक्सिको’ को नया नाम देकर ‘न्यू अमेरिका’ बनाने की पूरी तैयारी है। तर्क बड़ा सीधा है जब ज़मीन अपनी है, तो नाम में किसी और का ‘मैक्सिको’ क्यों चिपका रहे?
इतना ही नहीं, पानी पर भी अब सीधा-सीधा अमेरिकी पेटेंट ठोकने का खाका खींचा जा चुका है। मेक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico) को अब औपचारिक रूप से ‘अमेरिकन गल्फ’ कहा जाएगा, ताकि पानी की हर लहर को पता रहे कि वह किसके इलाके में हिलोरें ले रही है। उधर कनाडा की सीमा छूती ‘ओंटारियो झील’ भी इस भौगोलिक सर्जरी से नहीं बच पाई है; उसका नाम भी बदलकर सीधा-साट ‘अमेरिकन लेक’ करने का शाही हुक्म जारी हो चुका है।
अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर ट्रंप साहब का यह ‘नामकरण यज्ञ’ यूं ही चलता रहा, तो बहुत जल्द अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘ग्रेट ट्रंप सागर’ और उत्तरी ध्रुव का नाम ‘व्हाइट हाउस रूफटॉप’ रखा जा सकता है। फिलहाल दुनिया भर के एटलस छापने वाले प्रकाशक सिर पकड़कर बैठे हैं, क्योंकि जब तक वे अपनी किताबों में ‘मेक्सिको’ छापते हैं, ट्रंप का पेन उसे काटकर ‘अमेरिका’ लिख चुका होता है!