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नूरा कुश्ती जारी-दिल्ली में सर्किल रेट पर एलजी और केजरीवाल की जंग!

kejriwal & lg najib jung
नई दिल्ली(14अगस्त2015)- अब इसे नूरा कुश्ती कहें या फिर जनता को असल मुद्दों से भटकाने की साज़िश…?लगता यही है कि दिल्ली में जनता का भले ही कोई काम हो या न हो..! मगर एल जी नजीब जंग और दिल्ली के सीएम के बीच रार होना एक आम बात हो गई है.! इस बार दिल्ली सरकार और एलजी फिर आमने सामने हैं। और इसकी वजह है ज़मीनों का सर्किल रेट। दिल्ली के एलजी नजीब जंग ने सरकार द्वारा नए सर्किल रेट जारी करने के फैसले की फाइल लौटा दी है।
एलजी का कहना है कि ‘कानूनी तौर पर जमीन से जुड़ा मामला आरक्षित श्रेणी में आता है, इसलिए सरकार द्वारा इस पर अधिसूचना जारी करने का कोई औचित्य नहीं है। उधर केजरीवाल सरकार ने उपराज्यपाल द्वारा इस मामले की फाइल तलब करने को ही गलत करार दिया है। दिल्ली सचिवालय में केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि इस विषय पर संविधान के अनुसार एलजी के पास सीमित अधिकार हैं और एलजी सर्किल रेट से जुड़े विषय पर सरकार के परामर्श से काम करने का अधिकार रखते हैं। ये अलग बात है कि अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि एलजी ने मंत्रिमंडल द्वारा उनके खिलाफ प्रस्ताव पास होने से पहले सरकार को फाइल लौटाई है या बाद में। दरअसल राजनिवास से जारी रिलीज़ के मुताबिक़ जमीन की कीमत तय करना लैंड पूलिंग पॉलिसी के दायरे में आता है। और यह नीति अभी लागू नहीं हुई है क्योंकि इस नीति के दायरे में आने वाले दिल्ली के गांवों को शहरी होने का दर्जा अभी नहीं मिला है। इसलिए यह नीति लागू होने से पहले कृषि भूमि का सर्किल रेट तय कर देना कानूनी रूप से गलत होगा। कुल मिला कर कृषि भूमि पर सर्किल रेट बढ़ाने से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगाने के उप-राज्यपाल नजीब जंग के फैसले के मुद्दे पर सीधा टकराव मोल लेते हुए दिल्ली सरकार ने एक प्रस्ताव पारित किया है। जिसमें कहा गया है कि वह इस बाबत उप-राज्यपाल के निर्देशों का पालन नहीं करेगी। दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उप-राज्यपाल के निर्देशों का पालन न करें और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में कृषि भूमि के नए सर्किल रेट्स पर चार अगस्त की दिल्ली सरकार की अधिसूचना को लागू करना चाहिए। नजीब जंग ने 10 अगस्त को कृषि भूमि के लिए सर्किल रेट्स को बढ़ाने से जुड़ी सरकारी अधिसूचना पर रोक लगा दी थी और कहा था कि सरकार ने उनकी मंजूरी नहीं ली। उप-राज्यपाल ने कहा था कि उनका कार्यालय संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के मुताबिक अधिसूचना का परीक्षण कर रहा है।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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